Hindi Poem

Hindi Poem

hindi poem

मौत का रस्ता जरा आसान करदे,
कौन खम्बखत तेरे बगैर जियेगा,!
तेरी पलकों के ऊपर बैठे है मेरे ख्वाब,
उन्हें तोडना मत वरना कौन सियेगा!!
झील सी नीली आँखों में डूबा जब से
कौन पागल,मयखाने में पियेगा !
जो तेरे अधरों पर मुस्कान सजी,मेरे
इश्क़ की दास्ताँ,कह दीजियेगा !!
जुल्फों के साये,तूने जो केश सुलझाए
लहराये रख सकून दीजिएगा!
अब इनमे अपने ख़्वाबों के घर बनालू,
झटककर न दफ़न कीजिएगा !!

 

विह्वल पांचाली सभा-मध्य मधुसूदन पाहि पुकार रहीप्रासाद गूँजता आर्त्तनाद करुणा ध्वनि थी झंकार रही
द्वारिकाधीश ने टेर सुनी बिन पाँव उपानह चढ धायेसंकट मे द्रुपदसुता देखी वे वस्त्र अपरिमित बन कर छाये
हे कृपासिन्धु ! हे मधुसूदन ! हे दीनबन्धु ! पीताम्बर धरहे राधारमण ! त्रिलोकनाथ हत-मान आज दुष्टों के कर
सिर झुका चुके हैं भीष्म द्रोण कुरु-वैभव से दम तोड़ रहेअश्वत्थामा और कृपाचार्य न बोल रहे कुछ मौन गहे
मम चीर दुशासन खींच रहा निर्बल अबला की आस टुटीप्रहलाद उबारे , दैत्य दले , प्रभु राख आज मम लाज लुटी
पाण्डव बैठे सिर नीचे कर अति व्याकुल विह्वल आज हुईतुम बिन को आरत पक्ष गहे , अब राखु रमापति लाज गई
सब महारथी क्यों मौन साध , दिखलाते अद्भुत लाचारीतुम बिन अबला की कौन सुने सुधि लो प्रभु गोवर्धन धारी
ललकार रहे कुरुपति प्रचारि दुशासन खींचत वसन झारिकिस हेतु विलम्ब है आज प्रभो ! हे दीनबन्धु ! हे बनवारी !
सुन ग्राह ग्रसित गज की पुकार तुम नाथ ना लाये तनिक बारअब निपट विकल पांडव कुमार , बह रहे नयन आँसू अपार
जब वसन खींच कर दे उघार , तब आकर क्या होगा मुरारि ?गयी लाज न प्रभु पाओ सम्भार , हे दीनबन्धु ! अब लो उबार
मैं बीच सभा हो रही नग्न , तुम कृपा-सिन्धु किस जगह मग्नसुन द्रुपदसुता व्याकुल पुकार प्रभु प्रणतपाल सब ली संभार

 

Hindi Poem   Best Poem In Hindi

“मुख से जब पाहि पाहि काढ़ा प्रभु प्रकट रूप-पट तब बाढ़ा
खींचे पट जोर लगा जितना , तन-वसन तुरन्त बढ़ा उतना

काँपा अम्बर धरती घहरी , देखा कान्हा कर रूप सही
हयशाला में हय हिनहिनान , मंदिर मे मूरत गरज रही

द्रौपदी मान देखा रक्षित , सब चकि से थकित निहार रहे
तब दस सहत्र गज बल हारे , जब चक्रपाणि कर चक्र गहे

अति हर्ष विवश तब पांचाली , चिंघाड़ उठी जय वनमाली
जय सारंगधर जय असुरारी , जय जय जय केशी कन्सारी

जयकार गूँजता आसमान, चहुंओर जयति जय कृष्ण कहे
रोमावलि ठाढ़ी चकित रही , जब प्रथम पाहि से हाथ गहे

जय जय मधुसूदन बलिहारी, जय जय जय गोवर्द्धन धारी
दिनकर सम हरि का दिव्य तेज,कौरव दल पर हर पल भारी

जब विदुर लखेउ अनरथ भारी, पहुँचे जहाँ माता गान्धारी
सम्भव क्या द्रुपदसुता हारी, जिसके रक्षक प्रभु बनवारी”

याद की ज्वाला दिल मे तेरी, हर सिंगार वही है
आई दूर बिछड़ कर तुमसे, ये स्वीकार नहीं है

हूक तुम्हारी याद की आये मन ही मन अकुलाती
कैसे कह दूँ आज किसी से , तुमसे प्यार नहीं है

वही शाम है वही सुबह है , किंतु ना मन को भाती
मोहनी मूरति बसी नयन में , सम्मुख सार नही है

महक रही हैं दशों दिशायें , झूम रही अमराई
किन्तु तुम्हारे साथ घूम लूँ ये अधिकार नहीं है

पंथ निहारत सूनी अँखियाँ , बीत गई तरूणाई
अाँसुअन झड़ी लगी सावन में , ऋतु झंकार नहीं है

शून्य क्षितिज मे खोजें आँखे , तारों की गहराई
बोझ लिये मन लौटे पुनि पुनि , वह संसार नहीं है

सारे हैं अरमान अधूरे , मन आकुल विह्वल है
लाख बुझाऊँ मन ना माने , जो साकार नहीं है ।।

 

Hindi Poem 

आपके नेह में घुल गई इस तरह
हार दिल अपनी सुधबुध गँवाने लगी
चल पड़ी दो कदम प्यार की राह में
धड़कनें बहकीं और डगमगाने लगीं॥

पाँव से जब उठा भर लिया अंक में
मेघ उमड़े नयन जल बहाने लगे
मेरा खुद पर न कोई नियन्त्रण रहा
कलियाँ बिहँसीं चमन मुस्कुराने लगे ॥

प्राण में भर उठी कैसी दीवानगी
मिल गई जब तेरे प्यार की बानगी
तुम से छुप न सकी दिल की हालत मेरे
भर शरारत नयन मुस्कुराने लगे ॥

ज्योति मन में जली जब तेरे रूप से
उर पिघलता रहा स्नेह की धूप से
सारा संकोच पल में तिरोहित हुआ
आ प्रणय भाव फिर सुगबुगाने लगे।।

हिम शिखर दर्द का तब पिघलने लगा
ज्वाल भर मेरा तन मन दहकने लगा
गीतों गजलों मे तुमको ही गाने लगी
खो के सुध तन बदन गुनगुनाने लगे।।

उनसे नज़रें मिलीं खिल गये उर सुमन
छा गये मेरी पलकों में सावन के घन
टीस ने उर की विह्वल किया मेरा मन
फिर भरे नैन आँसूं बहाने लगे ।।

 

Best Poem In Hindi 

अपने उर को धधकती न ज्वाला बना
खुद जलेगा, जहां भी झुलस जाएगा
अपनी तासीर को चंदन जैसी बना
जो छुएगा तुझे वो महक जाएगा।

ऐसा होता है क्या? तूफां आए नहीं
सब्र कर लम्हा ये भी गुजर जाएगा
क्या कभी ये हुआ सूर्य निकला नहीं
कर प्रतीक्षा अंधेरा भी ढल जाएगा ।

बागवां ही अगर कलियों को नोंच दे
इस तरह तो गुलिस्तां उजड़ जायेगा
सौदेबाजी जो की तूने गर प्यार में
फिर भरोसे का बखिया उधड़ जाएगा।

नीम का पेड़ न अपने मुख में उगा
लाख गुणकारी हो पर खटक जाएगा
आइना सत्य का न दिखा हर घड़ी
झूठ के पत्थरों से चटक जाएगा।

कौन रुकता है जग में किसी के लिए
यदि रुका, कारवां ये गुजर जाएगा
कैद करना परिंदे को तू छोड़ दें
मौका मिलते ही पिंजरे से उड़ जाएगा।

अपने जीवन का मकसद समझ ले अगर
बनके कुंदन के जैसा निखर जाएगा
थाम कर हाथ रक्खा जो प्रभु का अगर
लाख गहरा हो सागर तू तर जाएगा।।

स्वरचित: रश्मि मिश्रा

हाशिये पर खड़े लोग,हमेशा होते हैं गेंद की तरह गोल,उनमें नहीं होती, कोई चपटी सतहजिसके पास हो उन्हें स्थिर कर पाने का हुनर,वे खाली पेट धंसी आंख और सूखे चेहरे के साथदेखते हैं कुछ दिन के आहार की बंदोबस्ती गाड़ीऔर भर लेते हैं अपने फेफड़ों मेंअगले कई वर्षों तक जी लेने लायक प्राणवायुऔर फिर लुढ़क जाती है गेंद बेहतरीन ताजातरीन विकल्प की ओरचले जाते हैं आश्वस्त होकर हवा में तैरते लोगगेंद को थोड़ी और गोलाई देकर……..

सरोज यादव””सरु””

 

Hindi Poem In Kids

पावस की अति घनघोर घटा
विरहिन नयनों मे नींद नहीं
वेदना हृदय भर कर अपार
उच्छ्वसित अश्रु से भीग रही

प्राणों में किसकी चाह भरी
तन मन से किसे पुकार रही
किसके आलिंगन को आतुर
किसका तुम पंथ निहार रही

किसके ख़ातिर तुमने अपनी
धड़कन में साज सजा डाला
किसका उन्मादित मन करने
निज तन में मलय बसा डाला

साँसों की तुम्हारी मधु मदिरा
किस तृषित-कंठ में ढलती है
वो दिव्य कांत छवि है किसकी
जो स्वप्न में प्रतिपल पलती है

वो विरह व्यथा किससे उपजी
जिस ने तपसी मन कर डाला
तन-मन का स्वामी कौन बता
किस ने कर डाला मतवाला

किसकी विरहाग्नि जलाती है
तन स्वर्ण-सा क्षार बना डाला
किस नाम को करके बीजमन्त्र
जपती रहती निशि दिन माला

मानिनी आज कह दे सब कुछपल पल तुझको तड़पाता जोसाक्षात् ब्रह्म से बढ़ कर क्यापाषाण हृदय बन जाता जो

कभी खामोश बैठोगे कभी तुम गुनगुनाओगे
बिकल कर जायेंगी यादें मुझे जितना भुलाओगे

कोई जब पूछ बैठेगा सबब खामोशी का तुमसे
बहुत समझाना चाहोगे मगर समझा न पाओगे

कभी दुनिया मुकम्मल बनके आयेगी निगाहों में
कभी मुझको कभी दुनिया को हर इक शह में पाओगे

Hindi Poem 

चले आओ अगर हमनाम सा कोई नाम मिल जाये
मुकद्दर रंग बदलेगा मुझे पहचान जाओगे

तुम्हें हम भूल कर भी आज तक न भूल पाये हैं
मिटा देगें यहाँ खुद को न तुमको भूल पायेगें

मैं दिल के जख़्म को भी देखकर हँसती हूँ ए-शशि
तेरे खातिर तरक्की को ये दिल से हम जलायेगें

शशि”

बीच महफिल मेरी आजमाइश हुई
आज फिर बेबसी की नुमाइश हुई।

जान जिसने गवाँ दी वतन के लिए
उसके ईमान की भी पैमाइश हुई।

तोड़ दी दम तड़पती हुई मछलियाँ
उनके जाने पर जम करके बारिश हुई।

खत्म जब हो गई जिंदगी की कथा।
फिर से कहने को उनकी गुजारिश हुई।

जब बुढ़ापे की आहट पड़ी कान में
लौट जाने को बचपन में ख्वाइश हुई।

डॉ. सरिता वैभव

 

Best Poem in Hindi

 

दर्द दिल का हँसकर, दिल से बिसरा दिया कीजिए राह में गम मिल जाएँ तो, देखकर मुस्कुरा दिया कीजिए।
एक दिन खिल जाएंँगी बहारें भी, फूल बनकर फिजा़ में बस इनकी खुशबू से जिंदगी थोड़ी महका लिया कीजिए।

न दुखों से शिकवा, न खुशियों का सौदा किया कीजिए
ये रहमतें हैं खुदा की दिल सेशुक्रिया अदा किया कीजिए।

खुद हँसकर औरों को भी, थोड़ा हंँसा लिया कीजिए
जिंदगी है दो पल की, जिंदादिली से जी लिया कीजिए।

न उफ कीजिए ओंठों से, चोट दिल पर खा लिया कीजिए
अपनों की खुशियों के लिए जख्मों को सी लिया कीजिए।

यूँ बातों ही बातों में खलिश,दिल की मिटा लिया कीजिए
मिले दुश्मन भी प्रेम से, हँसकर गले लगा लिया कीजिए।

एक दिन कदमों में होगा हुजूर, आपके यह आसमाँ भी
बस जरा सा एतबार खुद पर भी जता लिया कीजिए।
डॉ उषा बसाक

नफ़रतों को ज़हर मानता कौन है
है सियासत इसे जानता कौन है

पास बैठो मेरे और सुन लो ज़रा
चुप सी होठों पे रख बोलता कौन है

उम्र गुजरी है अपनी तेरे वास्ते
तुझको मेरे सिवा जानता कौन है

मैं इबादत में हूँ मैं सहादत में हूँ
पूछना न कभी दुसरा कौन है

जिसने जाना नहीं और न माना कभी
मशवरा उस बशर को दिया कौन है

एक दुनिया बसानी अगर प्यार की
सबको दिल में बसा रोकता कौन है

बेसबब शोहरतों ने नवाज़ा मुझे
दे रहा है मुझे ये… दुआ कौन है

मुझमें मुझसे अलग ग़र बसा है कुई
आईने तू बता वो दिखा कौन है

आजमाने की कोशिश न करना कभी
कौन जाने यहाँ……… देवता कौन है
गिरह

Bharati sharma

 

Hindi Poem For Kids

मुझे अपनी दुनिया मे ले जाने वाले
मुकरना तो तुमने सिखाया नही है

तेरे आने से एक आशा जगी थी
मगर तूने फिर मुस्कराया नही है

समेटे थे आँखो मे गहरी उदासी
मगर तूने दिल से हँसाया नही है

बिखरना था सपनें अगर टूट कर फिर
गले से मगर क्यो लगाया नही है

लिया जीत दिल तुमने मासूम वन कर
बचा क्या जहर जो पिलाया नही है

लबालब भरे इन आँखो मे आँसू
कहो पोंछ कर क्यो सुखाया नही है

तुम्हे पा के गर्वित हृदय से हुई थी
मेरे मान को क्यो निभाया नही है

सुन तेरे हर गम की दवा बनाना चाहती हूँ ,तेरे दिये हर ज़ख़्म को भुलाना चाहती हूँ ।

तू चाहे या ना चाहे चाहूँगी तुझे सदा उम्र भर ,तेरी जिन्दगी में मैं हर रंग बिखराना चाहती हूँ।

तू चाहे पा कर अपनी मंज़िल भूल जाना मुझे ,तेरी कामयाबी पर भी मै इतराना चाहती हूँ ।

अरमान बस यही कि बनूँ मैं तेरी शरीकेहयात ,अब तो डोली मे बैठ के तेरे घर आना चाहती हूँ।

दिल की चाहत है कि आये बहार गुलशन में तेरी ,
इराकी बगिया में कुछ फूल महकाना चाहती हूँ।

इरा जौहरी

Best Poem In Hindi

हो सजल नैन पद चूम चूममन प्रखर द्वंद में घूम घूमउम्मीद लगाये उस पथ परआयेंगे मेरे प्रिय जिस पर ॥

उनके आने से खिलें फूल
राहों में सुरभित मिले धूल
स्मित मुख धर वे दिव्य वेश
मन में न रहा अभिलाष शेष॥

उर में अगाध धर स्नेह प्रखर
जब भरा अंक में गया निखर
तब पिघल उठे दुख के पत्थर
धड़कन के स्वर जब हुये मुखर॥

उस मृदुल स्नेह की छाँह मिली
थकते जीवन को राह मिली
चमका चंदा खिल उठा गगन
झूमी पुरवा महका तन मन॥

होते विलीन तम घने सकल
धड़का उर लेकर सुन्दर लय
खिल गये सुमन हर रंग धरे
ज्यों इन्द्रधनुष शत रंग भरे॥

फैली बाँहें ज्यों दिव्य माल्य
अन्तर्मन स्नेहिल अति विशाल
झर रहे अश्रु ज्यों मेघ सघन
जलदान कर रहे तृषित अवनि॥

बाँधा बाहों में प्रमुदित मन
मानो भर लिया अनन्त गगन
उल्लास हृदय में हुआ सघन
बह चली सुवासित मंद पवन ॥

 

Best Poem in Motivational

 

यह जीवन भी क्या जीवन है .
जिसको ना समझ सके अपने
अहसास कराते वे पल पल
तुम देख रहे जो बस सपने ।।

 

दो पल की खुशियाँ आती हैं
सच मान उसे इतराती है
अति दर्द समेटे नयनों में
वह बार बार अकुलाती है ।।

 

फिर उस पीड़ा से बचने की
कोई राह नहीं दिख पाती है
छलकते नयन मन वेध रहे
वह सिसक सिसक रह जाती है।।

 

जब गहन वेदना विद्युत सी
रह रह के उर चुभ जाती है
नयनों से झरते अश्रु अगम
वह सिहर सिहर रह जाती है।।

 

काश कभी वे खुले हृदय से
अपना स्नेह समर्पण करते
कभी प्यार सच्चा मिल पाता
उनके स्नेह मेरे मन भरते ।।

 

दर्दों को हृदय समेट लिया
प्राणों ने अनुपम भेंट लिया
दुख बरस उठा बन सावन घन
व्याकुलता ने सुख मेट दिया ।।

 

जब हृदय मान निज खोता है
मन फूट फूट कर रोता है
अभिलाषा शेष न रही कोई
दिल क्षार क्षार हो टूटा है ।।

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Attitude Shayari

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